तुझसे मिलने को बेकरार रहता है कोई
हर पल मेरे ख्वाबो मे रहता है कोई
मरना तो है एक-न-एक दिन
लेकिन याद में तेरे हर पल मरता है कोई।।
हम वो नही जो धोखे दिया करते हैं
हम उनमे से हैं जो वफा किया करते है
दूर रहकर मिल ना शंकू शायद पर
याद बनकर साँसो मे बस जाया करते है।।
आवाज नही निकलती खफा होने के डर से
हम इजहार नही करते है रुसवा होने के डर से
बङी मुश्किल से पाया है तुमको
हम मिलने की बात नही करते जुदा होने के डर से।।
हम वो नही जो धोखे दिया करते हैं
ReplyDeleteहम उनमे से हैं जो वफा किया करते है
दूर रहकर मिल ना शंकू शायद पर
याद बनकर साँसो मे बस जाया करते है।।
कमाल है भाई ......बेहद खुबसूरत रचना
बेहतरीन रचना!!
ReplyDeleteवाह दुबे जी बहुत सुन्दर............
ReplyDeleteबहुत खूब दुबे जी अति सुंदर.....
ReplyDeleteबहुत खूब दुबे जी अति सुंदर.....
ReplyDeleteबहुत बढ़िया दुबे जी....
ReplyDeletebehtarin bhai ...bahut khub accha likha hai aapne
ReplyDelete----- eksacchai. { AAWAZ }
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वल्लाह! दुबे जी .............जवानी याद आ गयी वैसे मैं अभी जवान हूँ बस आपसे थोडा छोटा हूँ .............कायल हुए हम आपके या ज़रा ऐसे कह लू हम दिल दे चुके दुबे जी ................
ReplyDeleteKhoobsoorat Bhaav.
ReplyDelete( Treasurer-S. T. )
हम वो नही जो धोखे दिया करते हैं
ReplyDeleteहम उनमे से हैं जो वफा किया करते है
दूर रहकर मिल ना शंकू शायद पर
याद बनकर साँसो मे बस जाया करते है
UMDAA ....... LAJAWAAB, SACHMUCH SACCHE DIL SE YAAD KARNE PAR AISAA HI HOTA HAI ..... LAJAWAAB LIKKHA HAI...
Wah... bahut barhia... aise hee likhte rahiye
ReplyDeletehttp://hellomithilaa.blogspot.com
Mithilak Gap...Maithili Me
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Manpasand Gaane
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बहुत खुब , लाजवाब रचना दुबे जी.......
ReplyDeleteरचना पढ़कर आनंद आ गया. एक विनती है- "टंकन त्रुटियों" (जिसमें वर्तनी संबधी गलतियां भी शामिल हैं) के कारण रचना की प्रवाहमानता बाधित हो जाती है. यदि इनसे बचा जाए तो रसास्वादन और अधिक हो जाता है.
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पर आने हेतु धन्यवाद आपका....
आवाज नही निकलती खफा होने के डर से
ReplyDeleteहम इजहार नही करते है रुसवा होने के डर से
बङी मुश्किल से पाया है तुमको
हम मिलने की बात नही करते जुदा होने के डर से..aap baht achha likhte ho...
हम वो नही जो धोखे दिया करते हैं
ReplyDeleteहम उनमे से हैं जो वफा किया करते है
दूर रहकर मिल ना शंकू शायद पर
याद बनकर साँसो मे बस जाया करते है।।
बेहतरीन अशआरो के लिए,
बधाई!
हम वो नही जो धोखे दिया करते हैंहम उनमे से हैं जो वफा किया करते हैदूर रहकर मिल ना शंकू शायद परयाद बनकर साँसो मे बस जाया करते है।।
ReplyDeleteमिथिलेश,
सुन्दर भावः से पूर्ण रचना है....
दिल से लिखते हो...
लिखते रहो..
दीदी
आवाज नही निकलती खफा होने के डर से
ReplyDeleteहम इजहार नही करते है रुसवा होने के डर से
बङी मुश्किल से पाया है तुमको
हम मिलने की बात नही करते जुदा होने के डर से।
bahut khoob bhai..... dil ko choo gayi.......
अच्छी प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई....
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